Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • नहीं रोक सकते कर्मचारी का मेडिकल बिल, भले ही गैर पैनल्ड हॉस्पिटल में कराया हो इलाज
  • न्यायालय
  • राष्ट्रीय

नहीं रोक सकते कर्मचारी का मेडिकल बिल, भले ही गैर पैनल्ड हॉस्पिटल में कराया हो इलाज

RNS INDIA NEWS 07/05/2024
default featured image

नई दिल्ली (आरएनएस)। अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या किसी भी ऐसी कंपनी या संस्थान में काम करते हैं, जहां मेडिकल रिम्बर्समेंट की सुविधा है, तो ये खबर आपके लिए खास है। केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक आदेश में कहा है कि कोई भी नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को उसे उसकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने से नहीं रोक सकता है। कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर किसी कर्मचारी ने नियोक्ता या कंपनी के पैनल से बाहर के किसी दूसरे अस्पताल में इलाज करा लिया है तो उसके बिलों का भुगतान करने से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी किस अस्पताल में इलाज कराएगा, यह उसका अधिकार है
पीटी राजीवन बनाम भारतीय खाद्य निगम के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जी गिरीश की पीठ ने कहा कि सरकारी संस्थानों द्वारा जारी सर्कुलर, जो कर्मचारियों को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने से रोकता या सीमित करता है, कर्मचारी मुआवजा अधिनियम की धारा 4(2ए) का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि ये अधिनियम कार्य-संबंधित चोटों के लिए मेडिकल खर्च की भरपायी करने की अनुमति देता है।
इस मामले में राजीवन नाम के कर्मचारी, जो भारतीय खाद्य निगम में कार्यरत थे, अपनी ड्यूटी के दौरान घायल हो गए थे। उन्होंने अपनी पसंद के अस्पताल में अपना इलाज कराया, जिसका खर्च 35000 रुपये आया। उन्होंने इस मेडिकल बिल के भुगतान के लिए जब भारतीय खाद्य निगम के दफ्तर में कागजात जमा किए तो यह कहते हुए उनके बिलों का भुगतान करने से इनकार कर दिया गया कि उन्होंने निगम के पैनल के अस्पतालों से इतर किसी अन्य अस्पताल में इलाज कराया है, इसलिए उसके खर्च का भुगतान नहीं किया जा सकता है।
राजीवन ने इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की, जहां ट्रिब्यूनल ने 12 फीसदी ब्याज के साथ कुल भुगतान करने का आदेश दिया लेकिन भारतीय खाद्य निगम ने उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जी गिरीश ने आदेश दिया कि कर्मचारियों को यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद के किसी भी अस्पताल में इलाज कराएं, भले ही वह उसके नियोक्ता के पैनल में लिस्टेड हो या नहीं? हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि ऐसे अस्पतालों में हुई खर्च की राशि का भुगतान करने से नियोक्ता इनकार नहीं कर सकते।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: जूस विक्रेता के हाथ में चाकू घोंपा
Next: टिहरी जनपद में लोक अदालत 11 मई को

Related Post

default featured image
  • राष्ट्रीय

10 मिनट डिलीवरी के वादे पर सरकार ने लगाया ब्रेक, कंपनियों को विज्ञापनों से हटानी पड़ी समय सीमा

RNS INDIA NEWS 13/01/2026 0
default featured image
  • राष्ट्रीय

सगाई टूटने से नाराज युवक ने पूर्व मंगेतर की चाकू से हत्या की, दो आरोपी गिरफ्तार

RNS INDIA NEWS 10/01/2026 0
default featured image
  • राष्ट्रीय

सनसनीखेज खुलासा : इंसानों के ब्लड बैग में भरा मिला 1,000 लीटर जानवरों का खून, अधिकारी हैरान

RNS INDIA NEWS 09/01/2026 0

[display_rns_ad]

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 15 जनवरी
  • राज्य गठन के बाद बने फर्जी स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच करे सरकार
  • भारतीय गोरखाओं के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोश
  • लाखों के जेवरात उड़ाने वाला आरोपी पांच घंटे में गिरफ्तार
  • राज्य आंदोलनकारियों को बीस हजार रूपए पेंशन की मांग
  • मकर संक्रांति पर सिमकनी नौले के आसपास चला स्वच्छता अभियान

Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.